Amla rasayan

Posted by Desidawayi on 14 January 2022 | Herbs

amla benefits in hindi

आमलकी/आँवला

 

आमलकी जो सामान्यतया आँवला के नाम से जाना जाता है विशेष गुणों से भरपूर एक रसायन है। इसको अमृता, अमृतफल, शिवा, वयस्था, धात्री भी कहते हैं।

 


 

हिंदी नाम : आँवला

 

संस्कृत नाम : आमलकी

 

अंग्रेजी नाम : Indian gooseberry

 

वैज्ञानिक नाम : Emblica officinalis

 


 

आमले के रस में सबसे अधिक विटामिन सी तथा कुछ मात्रा में कार्बोहाइड्रेटस, कैल्शियम, फास्फोरस, लोहा, गैलिक एसिड, टैनिक एसिड, शर्करा आदि पाए जाते हैं। आँवला गुरु, रूक्ष, शीत गुण वाला, शीतवीर्य, मधुर विपाक होने से सेवन करने पर त्रिदोषहर विशेष रूप से पित्तशामक होता है। आमला फल या फलरस को प्रतिदिन सेवन किया जा सकता है। इसका नित्य सेवन करने से मनुष्य को रसायन से प्राप्त होने वाले सभी गुणों की प्राप्ति होती है।

 

आमलकी फल का प्रयोग कई बीमारियों में किया जाता है जैसे दाह, खाँसी, श्वास, कब्ज, अरुचि, रक्तपित्त, दमा, क्षय, हृदय रोग, मूत्र विकार, रक्त विकार, चर्म रोग, नेत्र रोग, दौर्बल्य, अम्लपित्त आदि। यह वीर्य को पुष्ट करके पौरूष को बढ़ाता है। सिर के बालों को काले, घने, लंबे रखता है। शरीर में अनावश्यक चर्बी को जमा होने से रोकता है। खून की कमी में भी लाभदायक है।

 

आधुनिक वैज्ञानिक शोधों के आधार पर इसमें एंटी बैक्टीरियल क्षमता पाई गई। है। कोलेस्ट्राल वृद्धि, अम्लपित्त वृद्धि, कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने में भी आमला फल रस पर कई शोध हुए हैं एवं इसको प्रभावी पाया गया है।

 

ऋतु अनुसार, ताजे फल की उपलब्धता के | अनुसार तथा रोगी व्यक्ति की स्थिति के अनुसार वैद्य की सलाह से आमला का प्रयोग करना चाहिए। डाबर आमला रस तथा डाबर आमला टैबलैट में आधुनिक पद्धति से निर्मित होने के साथ साथ सभी औषधीय गुण प्रचुर मात्रा में विद्यमान हैं।

 

ताजे आमला फलों के समान ही तथा आवश्यकतानुसार डाबर आमला रस या टैबलैट का प्रयोग निश्चिंत हो कर किया जा सकता है जिससे अनेकों अनेक बीमा रियों में लाभ होकर, स्वस्थ हो कर लंबी आयु का सेवन करें। मैं पिछले दस सालों से डाबर आमला रस तथा टैबलैट का चिकित्सा में प्रयोग कर रही है, और इसके गुणों का लाभ मिल रहा है ।

 

रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर, प्रतिदिन आंवले के रस का सेवन करना काफी लाभप्रद होता है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है, और खून की कमी नहीं होने देता।

 

benefits of amla in hindi
  • आंवला का जूस गैस की समस्या, कब्ज की समस्या में राहत देता है।

  • इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ-साथ शरीर को मजबूत बनाए रखता है।

  • भूख को बढ़ाने में मदद करता हैं।

  • तेजी से वजन कम करने में कारगार होता है।

  • शरीर में इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करता है।

  • कैंसर कोशिकाओं को शरीर में फैलने से रोकता है।

  • बालों को लंबे, काले, घने और मजबूत बनाता है।

  • त्वचा की रंगत बढ़ाता है।


 

आंवला चूर्ण और शहद का कैसे करें इस्तेमाल

 

1. एक चम्मच आंवला का रस और एक चम्मच शहद गर्म पानी के साथ लें। इससे आपका पाचन बेहतर होता है।

 

2. एक टेबलस्पून आंवला पाउडर में एक टेबलस्पून शहद मिलाएं। इसे रोज सुबह लेने से आपके लीवर को डिटॉक्स करने में भी मदद मिलती है।

 

3. कफ और खांसी ठीक करने के लिए आंवले के चूर्ण, शहद और एक चुटकी हल्दी मिलाकर खा सकते हैं।

 

4. रोजाना 20 ग्राम आंवला चूर्ण और एक चम्मच टेबल स्पून शहद साथ लें। यह आपको अस्थमा और आंखों की समस्या से निजात दिलाता है।

 

5. एक चम्मच आंवला जूस, एक चम्मच शहद और एक चम्मच अदरक का जूस मिलाएं। इसे रोजाना पीने से आपका इम्यून सिस्टम अच्छा रहता है।

 

 

आंवले में संतरे से 30 गुना ज्यादा विटामिन C पाया जाता है और ये कई तरह की मौसमी बीमारियों से दूर रखता है. हर दिन आंवला खाने से दिल की दिक्कतों से बचा जा सकता है. 

 

 


 

आँवले का आध्यात्मिक पहलु 

 

भारत में आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। आंवले के वृक्ष को भगवान विष्णु और शिव का प्रतीक माना जाता है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की आने वाली एकादशी (ग्यारस) के रूप में व्रत किया जाता है यह प्रथा पुराणों से चली आ रही है ऐसा माना जाता है कि जो स्त्रियां यह व्रत रखती है उसके पति की लंबी आयु बनी रहती है।

 


 

रसायन चिकित्सा

 

आयुर्वेद चिकित्सा के दो मुख्य प्रयोजन हैं जो व्यक्ति स्वस्थ हैं उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना तथा जो बीमार हैं उनके रोग दूर करके पुन: स्वस्थ बनाना। आज के समय में जबकि नई नई बीमारियां फैल रही हैं जिनके ना तो कारण का पता है ना जीवाणु विषाणु की पहचान हो पा रही है और ना ही कोई सटीक इलाज ही संभव हो पा रहा है। ऐसे में हमारी आयुर्वेद चिकित्सा का प्रथम उद्देश्य अधिक महत्वपूर्ण बनता जा रहा है कि जो व्यक्ति स्वर हैं वे स्वस्थ ही रहें, बीमारियों से ग्रसित ही ना हों। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए आयुर्वेद के आठ अंगों में से एक है - रसायन चिकित्सा ।

 

रसायन सेवन से सातों धातुओं का उत्तम निर्माण होने से ओजस वृद्धि होती है। ओजस का सम्बन्ध हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता से है।

 

शरीर में सभी घटकों की पूर्ति ठीक बनी रहे धात्वाग्नियों द्वारा आहार का पाचन एवं धातुओं की वृद्धि होती रहे इसके लिए रसायन का सेवन किया जाता है। शरीर में धातुओं का उचित निर्माण आवश्यक है जो व्याधिक्षमत्व के लिए जरूरी है। तात्पर्य यह है कि विभिन्न व्याधियों से बचने के लिए रसायन का सेवन सबके लिए युक्तियुक्त है। कुछ ऐसे रसायन हैं जो भोजन के पोषक रस में मिलकर धातु पोषण की प्रक्रिया में सहायक होते हैं जैसे दूध, घी, खजूर आदि कुछ रसायन द्रव्य शरीर की अग्नियों को तेज कर के शरीर में पाचन क्रिया के माध्यम से धातुओं को प्रशस्त करते हैं जैसे - पिप्पली। ऐसे रसायन जो शरीर में स्रोतोशोधन कर के रस संवहन की प्रक्रिया को तीव्र करते हैं तथा धातुओं का पोषण करते हैं जैसे गुग्गुलु।

 

रसायन का उपयोग

 

ऐसे रसायन द्रव्य हैं जिनका उपयोग सभी व्यक्ति प्रतिदिन कर सकते हैं परंतु कुछ विशेष द्रव्य वात प्रकृति व्यक्तियों के लिए ही विशेष रूप से लाभकर होते हैं जैसे - नागबला। इसी प्रकार पित्त और कफ प्रकृति के व्यक्तियों में भी विशेष लाभ करने वाले रसायन भिन्न होते हैं।

 

आयु, ऋतु, काल, देश की भिन्नता के अनुसार सभी का उचित विचार कर एक वैद्य द्वारा रसायन का निर्धारण किया चाहिए।

 

अतः प्रकृति का विचार कर के रसायन सेवन से अधिक लाभ मिलता है।

 

 

आयुर्वेदिक रसायन- आमलकी डाबर आमला रस/ टैबलैट / चूर्ण / तैल आदि।

 

Major Brands of Amla in Market

  • Dabur Amla Tablets
  • Himalaya Amla Tablets

 

Diclaimer : प्रस्तुत लेख केवल आम जानकारी के लिए है, इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। 

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